बहुत जल्द मिलने वाला है, भारत को वर्ल्ड-क्लास रेलवे स्टेशन…

 

भोपाल के पहले वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन हबीबगंज का नाम जल्द ही रानी कमलापति स्टेशन हो जाएगा. 15 नवंबर को प्रधानमंत्री इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर देंगे. राज्य के परिवहन विभाग ने स्टेशन का नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे कल मंजूरी  दी गई.

रानी कमलापति गिन्नौरगढ़ के मुखिया निजाम शाह की विधवा और अंतिम आदिवासी गोंड शासक थीं, और अब इस स्टेशन को उन्हीं के नाम से पहचाना जाएगा. 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का ऐलान किया है.


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यह  दिवस एक हफ्ते चलेगा, जिसमें भारत के अनुसूचित जनजाति के गौरव को दिखाया जाएगा. गोंड भारत का सबसे बड़ी आदिवासी समुदाय है, जिसमें 1.2 करोड़ से ज्यादा आबादी है. भाषाई रूप से, गोंड द्रविड़ भाषा परिवार की दक्षिण मध्य शाखा के गोंडी-मांडा उपसमूह से संबंधित है. इस रेलवे स्टेशन पर अब यात्रियों को शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, हॉस्पिटल, मॉल, स्मार्ट पार्किंग, हाई सिक्योरिटी समेत कई आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी.

 

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हबीबगंज रेलवे स्टेशन ट्रेनों में ग्रीन टॉयलेट बनाने का काम शुरू करने वाले हबीबगंज स्टेशन का निर्माण आजादी से पहले अंग्रेजों ने करवाया था.

1979 में इसका विस्तार हुआ था. 1901 में भारत की 42 रियासतों के स्वामित्व वाले रेलवे को जोड़कर इंडियन रेलवे बना.

 इंडियन रेलवे

आजादी के बाद बड़े शहरों को जोड़ने के लिए कई लाइनों को री-रूट किया गया और नई लाइनें बनाई गईं. भारत की 42 रियासतों के स्वामित्व वाले रेलवे को जोड़कर इंडियन रेलवे का गठन हुआ. 1947 में आजादी के बाद भारतीय रेल का 55 हजार किलोमीटर का नेटवर्क था. 1952 में मौजूदा रेल नेटवर्क को एडमिनिस्ट्रेटिव पर्पज के लिए 6 जोन में डिवाइड किया गया.

आखिर क्यों नाम पड़ा हबीबगंज

1979 में हबीबगंज रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया. हबीबगंज का नाम भोपाल के नवाब हबीब मियां के नाम पर रखा गया था. पहले इसका नाम शाहपुर था लेकिन साल 1979 में रेलवे ने विस्तार करके नाम हबीबगंज रखा. उस समय एमपी नगर का नाम गंज हुआ करता था तब दोनों को जोड़कर हबीबगंज रखा गया था. हबीब मियां ने 1979 में स्टेशन के विस्तार के लिए अपनी जमीन दान में दी थी. इसके बाद इसका नाम हबीबगंज रखा गया था.

ISO प्रमाण पत्र हासिल करने वाला वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन हबीबगंज के आसपास की सुंदरता और आसपास की हरियाली और झीलों का चलते इसकी सुंदरता दोगुनी हो जाती है. अरबी भाषा में हबीब का अर्थ होता है प्यारा और सुंदर. भोपाल के नवाब की बेगम ने यहां की हरियाली और झीलों के बीच बसे इस गांव का नाम हबीबगंज रखा था. जब रेलवे लाइन बिछाई गई, तब इटारसी-भोपाल के बीच बुधनी, बरखेड़ा, औबेदुल्लागंज और मंडीदीप स्टेशन बनाए गए थे. इसके एग्रीमेंट में था कि यह रेल लाइन ब्रॉडगेज होगी. किताब के मुताबिक भोपाल नवाब परिवार की मिल्कियत वाली जमीनों में 122.36 किलोमीटर रेलवे लाइन भी थी. होशंगाबाद (नर्मदा नदी के पुल) से भोपाल तक 70.80 किमी रेल लाइन के लिए बेगम शाहजहां ने 1 नवंबर 1884 को जमीन दी थी. इसके लिए उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के साथ एग्रीमेंट किया था. इसके बाद भोपाल स्टेट रेलवे बनाया गया था.

 

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