विश्व साइकिल दिवस पर लें पर्यावरण सुरक्षित करने, सेहत बनाने और पैसे बचाने के तीन संकल्प।

विशेष, 3 जून, 2020

पूरा विश्व कोविड-19 (कोराना वायरस) महामारी से जूझ रहा है। महीनों तक लोग घरों में बंद रहे। लेकिन अब भारत सहित विश्व के ज्यादातर देशों में लॉकडाउन शर्तों के साथ खुल चुका है। लोगों को आने-जाने और घूमने की छूट मिल चुकी है। भारत सहित कई देशों में सार्वजनिक परिवहन पर अभी भी पाबंदी लगी हुई है। ऐसे में लोग अपनी निजी वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। निजी वाहनों के इस्तेमाल को लेकर भी अलग-अलग देशों की अलग-अलग गाइडलाइंस हैं। भारत में दोपहिया वाहन पर सिर्फ एक व्यक्ति ही बैठ सकता है। कार में ड्राइवर औऱ पिछली सीट पर एक सवारी ही बैठ सकती है। बसों में, हवाई जहाज में एक सीट छोड़कर यात्रियों को बिठाया जा रहा है। यानि धीरे-धीरे बंद पड़े चक्के अब सड़कों पर घूमने लगे हैं।

लगभग 70 दिनों तक लॉकडाउन रहने से भारत की जलवायु और पर्यावरण बेहद साफ-सुथरा हो गया था, लेकिन वाहनों और कारखानों में मशीनों के घूमने के साथ ही पर्यावरण और हवा के वापस दमघोंटू होने की आशंका बलवान हो चली है। कोविड-19 संक्रमण प्रदूषण में लोगों पर ज्यादा घातक साबित हुआ है।

विश्व साइकिल दिवस पर तीन संकल्प जरूर लें।

आज विश्व साइकिल दिवस पर हर व्यक्ति को ये तीन संकल्प जरूर लेने चाहिये। पहला नियमित साइकिल का इस्तेमाल कर अपनी सेहत सुधारूंगा।

दूसरा साइकिल परिवहन का सस्ता साधन है, साइकल से आ-जाकर धन की बचत करूंगा। और

तीसरा साइकिल प्रदूषण विहीन है। साइकिल चलाकर पर्यावरण को सुरक्षित करूंगा।

विश्व साइकिल दिवस पर आपके द्वारा लिये गए ये तीन संकल्प आपके जीवन में चमत्कारिक बदलाव ला सकते हैं।

अप्रैल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 जून को अंतर्राष्ट्रीय विश्व साइकिल दिवस के रूप में घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र ने साइकिल को पर्यावरण के अनुकूल, परिवहन का सस्ता साधन, विश्वसनीय और सेहत के लिए फायदेमंद मानते हुए 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाए जाने की घोषणा की थी। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि साइकिल न सिर्फ कई लोगों को रोजगार मुहैया कराती है, बल्कि बच्चो और युवाओं को शारीरिक शिक्षा भी प्रदान करती है।

साइकिल वर्गभेद को समाप्त करती है। साइकिल पर चलने वाले लोगों के बीच अमीर-गरीब का अंतर समाप्त हो जाता है। साइकिल आपको समाजिक और संस्कृति से जोड़ने का काम करती है। साइकिल से चलना आपको कई संभावित सड़क दुर्घटनाओं से बचाता है।

इतिहास
यूरोपीय देशों में साइकिल के प्रयोग का विचार लोगों के दिमाग में 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ही आ चुका था, लेकिन इसे मूर्तरूप सर्वप्रथम सन् 1816 में पेरिस के एक कारीगर ने दिया. उस यंत्र को हॉबी हॉर्स, अर्थात काठ का घोड़ा, कहते थे. पैर से घुमाए जानेवाले क्रैंकों (पैडल) युक्त पहिए का आविष्कार सन् 1865 ई. में पैरिस निवासी लालेमें (Lallement) ने किया. इस यंत्र को वेलॉसिपीड (velociped) कहते थे. इसपर चढ़नेवाले को बेहद थकावट हो जाती थी. अत: इसे हाड़तोड (bone shaker) भी कहने लगे. इसकी सवारी, लोकप्रिय हो जाने के कारण, इसकी बढ़ती माँग को देखकर इंग्लैंड, फ्रांस और अमेरिका के यंत्रनिर्माताओं ने इसमें अनेक महत्वपूर्ण सुधार कर सन् 1872 में एक सुंदर रूप दे दिया, जिसमें लोहे की पतली पट्टी के तानयुक्त पहिए लगाए गए थे. इसमें आगे का पहिया 30 इंच से लेकर 64 इंच व्यास तक और पीछे का पहिया लगभग 12 इंच व्यास का होता था. इसमें क्रैंकों के अतिरिक्त गोली के वेयरिंग और ब्रेक भी लगाए गए थे.

भारत में साइकिल का इतिहास
भारत में भी साइकिल के पहियों ने आर्थिक तरक्की में अहम भूमिका निभाई. 1947 में आजादी के बाद अगले कई दशक तक देश में साइकिल यातायात व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा रही. खासतौर पर 1960 से लेकर 1990 तक भारत में ज्यादातर परिवारों के पास साइकिल थी. यह व्यक्तिगत यातायात का सबसे ताकतवर और किफायती साधन था. गांवों में किसान साप्ताहिक मंडियों तक सब्जी और दूसरी फसलों को साइकिल से ही ले जाते थे. दूध की सप्लाई गांवों से पास से कस्बाई बाजारों तक साइकिल के जरिये ही होती थी. डाक विभाग का तो पूरा तंत्र ही साइकिल से चलता था. आज भी पोस्टमैन साइकिल से चिट्ठियां बांटते हैं.

साइकिल चलाने के फायदे

– रोजाना आधा घंटा साइकिल चलाने से पेट की चर्बी कम होती है. रोजाना सुबह के वक्त साइकिल चलाने से आपकी फिटनेस बरकरार रहती है.

– आप ये जानकार थोड़ा हैरानी होगी कि साइकिल चलाने से इम्यून सिस्टम ठीक तरीके से काम करता है. एक रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन आधा घंटा साइकिल चलाने से इम्यून सेल्स एक्टिव हो जाते हैं और बीमार होने का खतरा कम हो जाता है.

– लगातार साइकिल चलाना घुटने और जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को आराम पहुंचाता है.

– एक रिसर्च के अनुसार जो इंसान रोजाना 30 मिनट साइकिल चलाता है उसका दिमाग साधारण इंसान के मुकाबले ज्यादा एक्टिव रहता है और ब्रेन पाॅवर बढने के चांसेज भी 15 से 20 प्रतिशत तक बढते है.

– साइकिल सबसे सस्ता साधन है. जहां आपको दूसरी गाड़ियों में तेल के लिए पैसे खर्च करेने होंगे. वहीं आपको साइकिल में ऐसा कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं है. स्वास्थ्य के साथ-साथ साइकिल आपके पैसे बचाने का काम भी करती है.

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