10वीं के बाद किस स्ट्रीम में प्रवेश लें, किस विषय को चुनें, अगर आपके बच्चे ऐसे सवालों से जूझ रहे हैं तो निसंकोच करियर काउंसलर की सलाह लेँ।

रायपुर, 28 मई 2020

वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण के चलते देश के ज्यादातर राज्यों में 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं इस वर्ष नहीं हो पाई हैं। सीबीएसई और राज्यों के बोर्ड से अनुमति मिलने पर स्कूलों ने अपने 10वीं और 12वीं के छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया है। लेकिन 10वीं कक्षा में बिना परीक्षा के मिली इस सफलता के बाद ज्यादातर विद्यार्थियों के मन में ये सवाल उठता है कि 10वीं के बाद अब आगे क्या करेँ। किस विषय की पढ़ाई करें। कौन सा स्ट्रीम उनके लिए अच्छा रहेगा और किस स्ट्रीम में प्रवेश लेकर वो किस करियर को आगे चलकर अपना सकेंगे।

यह जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय क्यों है ?

इस तरह के सवाल उम्र के इस पड़ाव पर उठना स्वाभाविक है। यही वो वक्त होता है जब किसी भी छात्र के भविष्य की आगे की दशा और दिशा तय होती है। 10वीं के बाद किस विषय, किस स्ट्रीम में प्रवेश लें, इसकी अगर सटीक जानकारी न मिले तो कई बार छात्र अपने दोस्तों के कहने या बिना सोचे-समझे ऐसी स्ट्रीम में प्रवेश ले लेते हैं, जिसमें आगे चलकर उन्हें कई तरह की परेशानी हो जाती है। कई विद्यार्थी यह भी सोचते है कि साइंस लेकर पढ़ते है क्योंकि साइंस अच्छा हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि कोई भी स्ट्रीम बुरा नहीं हैं। आप अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्ट्रीम का चयन करें और उसी स्ट्रीम से आगे पढ़ाई करें जो आपके लक्ष्य को पाने में लाभदायक हो।

आप को किन किन स्ट्रीम्स का चयन करना चाहिए ?-

जैसे अगर डॉक्टर, इंजीनयर बनना आपका लक्ष्य है तो निःसन्देह आप साइंस स्ट्रीम से आगे पढ़ाई करें। लेकिन वहीं अगर आपका लक्ष्य डॉक्टर इंजीनियर बनना नहीं हैं, कुछ और है तो आप अपने लक्ष्य के अनुसार उसी स्ट्रीम का चयन करें। जैसे अगर आपको कॉमर्स क्षेत्र में आगे बढ़ना हैं तो आप बिना सोचे कॉमर्स में प्रवेश लें। ठीक ऐसे ही जिस क्षेत्र में आपकी रुचि हो, जिस क्षेत्र में आप आगे बढ़ना चाहते हैं उसी विषय का चयन करें और अभी में अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए अत्यधिक पढ़ाई करें।

आमतौर पर ऐसा होता है कि स्टूडेंट एक बेहतरीन गाइडलाइन नहीं मिल पाने के वजह से वे सही रास्ते का चयन नहीं कर पाते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि उनको लक्ष्यों तक पहुँचने में अधिक समय लगता हैं एवं अधिक कठिनाइयां भी होती हैं।क्योंकि सही समय पर बेहतरीन दिशा निर्देश नहीं मिलने पर ऐसा देखा जाता हैं कि बहुत से स्टूडेंट इधर से उधर भटकते हैं।जैसे कि कोई स्टूडेंट पहले आईआईटी की तैयारी किया तो फिर नहीं होने पर बैंकिंग की तैयारी शुरू कर दिया तो फिर कुछ समय बाद यूपीएससी की तैयारी करता है।इस तरह से लक्ष्यों से विचलित होने से मुकाम तक पहुंचना मुश्किल हो जाता हैं।इसलिए किसी एक लक्ष्य को निर्धारित करें एवं उसी के अनुसार विषयों का चयन करें और मैट्रिक के बाद ही एक लक्ष्य को निर्धारित कर उस मुकाम तक पहुँचने के लिए संघर्ष करे तभी सफलता मिलेगी।

  1. साइंस

सामान्यतः सबका पसंदीदा विषय – विज्ञान अधिकांश स्टूडेंट्स का पसंदीदा विषय होता है और लगभग हर माता पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा विज्ञान विषय से ही पढ़ाई करे. यह स्ट्रीम स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग, चिकित्सा, आईटी और कंप्यूटर विज्ञान जैसे कई आकर्षक करियर विकल्प प्रदान करती है और विभिन्न डोमेनों में शोध करने का अवसर भी प्रदान करती है. दसवीं के बाद विज्ञान विषय चुनने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे लेने के बाद आगे चलकर वे आर्ट्स या कॉमर्स किसी भी स्ट्रीम में एडमिशन ले सकते हैं. इसके विपरीत अगर आपने 12 वीं तथा ग्रेजुएशन आर्ट्स या कॉमर्स से की है तो आप भविष्य में साइंस नहीं ले सकते हैं जबकि साइंस स्ट्रीम वाले पुनः किसी भी स्ट्रीम का चुनाव कर सकते हैं. 

जहां तक ​​ कक्षा 11 वीं और 12 वीं का सवाल है,तो आपको कंप्यूटर विज्ञान, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ ऐच्छिक विषयों के साथ भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और गणित जैसे आधारभूत विषयों का चयन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स द्वारा चुने गए इंस्ट्रक्शन के भाषा के आधार पर उन्हें एक अनिवार्य भाषा का भी चुनाव करना होगा. साथ ही क्लास में थियरी की पढ़ाई के अतिरिक्त लेबोरेट्री में प्रैक्टिकल भी करना होगा.

यदि आप इंजीनियरिंग में दिलचस्पी रखते हैं तो आप पीसीएम या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित को मूल विषयों के रूप में चुन सकते हैं, लेकिन आगर आप मेडिसिन में रुचि रखते हैं तो  आप पीसीएमबी या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित + जीवविज्ञान ले सकते हैं.

2. कॉमर्स

बिजनेस के लिए सर्वश्रेष्ठ – साइंस के बाद स्टूडेंट्स द्वारा सर्वाधिक पसंद किया जाने वाला स्ट्रीम है कॉमर्स. यदि स्टैटिक्स, फायनांस या इकोनॉमिक्स के फील्ड में जाना चाहते हैं तो आपको इस स्ट्रीम का चुनाव करना होगा. अगर करियर की बात की जाय तो कॉमर्स स्ट्रीम से चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरी, एकाउंटेंट्स, निवेश बैंकिंग और वित्तीय सलाहकार जैसे कुछ सबसे अधिक आकर्षक और उच्च भुगतान वाली नौकरियों में जाया जा सकता है हालांकि, इसकेलिए कक्षा 12 के बाद इन संबंधित डोमेन में प्रोफेशनल कोर्सेज का चयन करना होगा.

कॉमर्स स्टूडेंट्स के रूप में आपको बिजनेस इकोनॉमिक्स, एकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडी और बिजनेस लॉ आदि मुख्य विषयों का अध्ययन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स को कॉमर्स स्ट्रीम के एक हिस्से के रूप में अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, इनकम टैक्स, मार्केटिंग और जेनरल बिजनेस इकोनोमिक्स में आधारभूत प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. साइंस के स्टूडेंट्स की तरह ही इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा का चयन करना होता है.

3. आर्ट्स/कला/मानविकी

आर्ट्स आज भी स्टूडेंट्स का बीच बहुत काम पसंद किया जाने वाला विषय है जबकि इस क्षेत्र में अवसरों की भरमार है. लेकिन आजकल इस विषय को लेकर लोगों की धारणा बदली है तथा अधिकतर स्टूडेंट्स आर्ट्स विषय लेना पसंद कर रहे हैं. यह कुछ रोचक ऑफ-बीट और रोमांचक कैरियर के अवसर प्रदान कर रही है. पहले आर्ट्स विषय को उन्हीं स्टूडेंट्स के लिए सही माना जाता था जो आगे चलकर शोध में दिलचस्पी रखते थें लेकिन अब यह धारणा बिलकुल बदल चुकी है. आजकल आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास अन्य स्ट्रीम की भांति ही आकर्षक और संतोषजनक करियर विकल्प मौजूद हैं. एक आर्ट्स का स्टूडेंट जर्नलिज्म, लिटरेचर, सोशल वर्क, एजुकेशन और कई अन्य करियर विकल्पों का चयन कर सकता है.

जहां तक ​​विषयों का संबंध है, तो आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास विभिन्न प्रकार के विषयों के चयन का विकल्प होता है  जिनमें से समाजशास्त्र, इतिहास, साहित्य, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, दर्शन, अर्थशास्त्र इत्यादि विषय शामिल हैं. इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा विकल्प का चयन करना पड़ता है.

इसके अतरिक्त कुछ अन्य बातें -पिछले दशक में  भारत के शिक्षा क्षेत्र में बहुत विविधता देखने को मिली है, इसकी वजह से दसवी के बाद कई सुनहरे करियर विकल्प मौजूद हैं. कई ऐसे कई शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेशन कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, व्यावसायिक पाठ्यक्रम और यहां तक ​​कि कुछ प्रोफेशनल कोर्सेज भी हैं जिन्हें आप अपनी दसवीं कक्षा पूरी करने के बाद चुन सकते हैं. एक दसवीं के छात्र होने के नाते यह हो सकता है कि आपको भविष्य में मिलने वाले सभी अवसरों तथा उसके अंतर्गत आने वाली चुनौतियों का सही ज्ञान न हो, तो ऐसी परिस्थिति में किसी काउंसेलर की मदद लें.

निर्णय लेने के दौरान किन किन बातों पर गौर करना चाहिए?-

अब आपको प्रत्येक विषय तथा स्ट्रीम्स की जानकारी हो चुकी है तो अब आपके लिए कौन सा स्ट्रीम तथा विषय आपके लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है यह निर्णय लेने का समय होता है. लेकिन अभी भी यदि आप निर्णय लेने में अपने आप को समर्थ नहीं पा रहे हैं तो आप को घबड़ाने की जरुरत नहीं है. कभी भी जीवन से सम्बंधित ऐसे निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिए जाने चाहिए. इस प्रक्रिया को आपके लिए थोड़ा और सरल बनाने के उद्देश्य से यहाँ कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं जिनका पालन आपको करना चाहिए-

अपनी रुचियों और जुनून का आकलन करें

अक्सर हम देखते हैं कि बहुत सारे प्रोफेशनल्स अनचाहे मन से काम करते हैं तथा अपने काम में दैनिक रूप से पीसते हुए नजर आते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि आप ऐसा बिलकुल नहीं चाहेंगे. जीवन में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए हमेशा अपनी रुचियों और जुनूनों  को ध्यान में रखना चाहिए.

और इस प्रक्रिया में आपका पहला कदम यह पहचाने का होना चाहिए कि कौन सा विषय या करियर विकल्प आपको उत्साहित करता है. आप जीवन भर उसके लिए कुछ कर सकते हैं और कभी भी इससे नाखुश और असंतुष्ट नहीं हो सकते,केवल तभी आप वास्तव में इसका आनंद उठा सकते हैं.इसलिए, चाहे आप कोई भी स्ट्रीम चुनते हों,  सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आप इसके अंतर्गत कवर किए गए विषयों में दिलचस्पी रखते हैं या नहीं.

अपनी शक्तियों और कमजोरियों का विश्लेषण करें

अपनी रुचियों का आकलन करने के बाद,आपके लिए दूसरा कदम अपने स्किल्स और क्षमताओं का आकलन करना है. यदि आप केवल अपनी रुचि के आधार पर एक एक स्ट्रीम चुनते हैं लेकिन इसमें शामिल विषयों को समझने का सही स्किल  और क्षमता आपमें नहीं है, तो भविष्य में यह आपके लिए एक बड़ी समस्या पैदा करेगा. उदाहरण के लिए, आपकी रूचि प्राइमरी साइंस में हो सकती है लेकिन 12 वीं के स्तर पर पढ़ाए जाने वाले साइंस  विषय अधिक विस्तृत और कठिन लग सकते हैं. मानलीजिये आपका मौलिक अंकगणित बहुत अच्छा है लेकिन हो सकता है कि 12 वीं के पीसीएम में पढ़ाया जाने वाला मैथ आपको बहुत कठिन लगे. तो आप उन विषयों में बेहतर रीजल्ट नहीं दे पाएंगे. इसलिए हमेशा अपने स्किल्स और क्षमताओं का पूर्ण विश्लेषण करना चाहिए, अपनी ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार किसी भी स्ट्रीम का चयन करना चाहिए.

सही करियर विकल्प की पहचान करें

एक बार जब आप उन चीज़ों की पहचान करना शुरू करते हैं जिनके बारे में आप रुचि रखते हैं, तो बहुत सारे और विविध विकल्प आपके सामने होते हैं, जिनमें से सबका चयन करना सही निर्णय नहीं हो सकता है. उदाहरण के लिए मानलीजिये कि आपको पतंग उड़ाना बहुत पसंद है, लेकिन एक करियर विकल्प के रूप में इसका चयन करना शायद एक सही निर्णय नहीं हो सकता है.

इसलिए, आपको यह पहचानने की आवश्यकता है कि आपके कौन से इन्ट्रेस्ट क्षेत्र आपको अच्छे अवसर प्रदान कर सकते हैं, जिसमें आप एक स्थायी करियर बना सकते हैं. इसके लिए आप प्रोफेशनल करियर काउंसेलर की मदद ले सकते हैं. वे आपको अपने कौशल का विश्लेषण करने में मदद कर सकते हैं और सही करियर विकल्प चुनने में आपकी सहायता कर सकते हैं.

दूसरों की मदद लें

ऊपर के पहले तीन चरणों के बाद भी, यदि आपको अभी भी लगता है कि आप स्ट्रीम के चयन को लेकर भ्रमित और अनिश्चित हैं, तो आपको कक्षा 10 के बाद अपने माता-पिता, प्रोफेशनल काउंसेलर या सीनियर से सलाह लेनी चाहिए. आजकल मार्केट में कई अन्य करियर विकल्प और अवसर मौजूद हैं जो कक्षा 10 के बाद आपकी  प्रतीक्षा कर रहे हैं जिनका आप चयन कर सकते हैं. माता-पिता, प्रोफेशनल काउंसेलर या सीनियर आपको हमेशा सही सलाह देंगे तथा सही स्ट्रीम के चयन में आपकी भरपूर मदद करेंगे.

मैट्रिक के बाद आप अपने लक्ष्य को ध्यान में रखें अपने रुचि में ध्यान रखिये तब स्ट्रीम का चयन करें, एवं उसके बाद ही अपने लक्ष्य को पूरा करने में दिलों जान से जुट जाएं।कभी ये न सोचें कि कोई स्ट्रीम छोटा हैं या कोई स्ट्रीम बड़ा हैं और यह भी कभी न सोचें कि मेरा लक्ष्य छोटा हैं दूसरों का लक्ष्य बड़ा,बल्कि अपने लक्ष्य को बड़ा समझें और उसे पूरा करने के लिए लगातार जुटे रहें।क्योंकि लक्ष्य बड़ा रखने से कुछ नहीं मिलता बल्कि उसे पूरा करने से मिलता हैं।

जैसे मान लीजिए कि आपका कोई साथी हो उसने कहां की मेरा लक्ष्य आईएएस बनना हैं और अगर आपका लक्ष्य एक क्लर्क बनना हैं और अगर आपका साथी संघर्ष नहीं करता हो और आप लगातार मेहनत कर रहे हो तब आप तो जरूर सफल हो जाएंगे क्योंकि आप मेहनत कर रहे है लेकिन आपका साथी जो कि बिल्कुल मेहनत नहीं कर रहा हैं तो वे सफल कैसे होगा तो उसे बड़ा लक्ष्य ही रखने का क्या फायदा जब सफलता ही नहीं मिली वहीं आप छोटा ही लक्ष्य रखे लेकिन सफल तो हो गए। हाँ लक्ष्य बड़ा रखना चाहिए लेकिन उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी दिलों जान से जुटे रहना चाहिए तभी बड़ा लक्ष्य रखने का भी कोई फायदा अन्यथा कोई फायदा नहीं हैं।इसलिए चाहे आपका कोई लक्ष्य भी लक्ष्य को उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते रहिए तभी सफलता मिलेंगी।

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