श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में एल्युमिनाई मीट में एक-दूसरे से मिल भावुक हुए छात्र और शिक्षक।

दुर्ग, 23 नवंबर,

मिलना और बिछुड़ना नियति के दो संयोग हैं। लेकिन इन दोनों ही अवसरों पर कई बार मन इतना भावुक हो जाता है कि आंखों से आंसुओं की धारा बह निकलती है। ऐसे में मिलने और बिछुड़ने का ये संयोग अगर अपने पुराने दोस्तों के साथ हो अथवा शिक्षकों का अपने प्रिय गुरुजनों से मिलने का अवसर हो तो भावनाओं के उबाल का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

वो कॉलेज के दिन, वो मस्ती भरी बातें, वो पढ़ाई की चिंता फिर एग्जाम से पहले तनाव दूर करने के लिए मित्रों से लिए गए टिप्स। इस तरह के कई अनुभव छात्रों ने उस वक्त आपस में शेयर किये जब सालों बाद वो वापस अपने उसी पुराने कॉलेज में पहुंचे जहां उनके जीवन की खट्टी-मीठी यादें जुड़ी हैं।

मौका था श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी कुम्हारी में आयोजित एल्युमिनाई मीट का। जिसमें एसआरआईपी से पढ़कर निकले सभी छात्र-छात्राओं को वापस एक मंच पर लाकर उनके विचार और सफलता की कहानियां आपस में साझा करने के लिए रीयूनाइट किया गया। एसआरआईपी की एल्युमिनाई मीट में सभी पूर्व छात्र पहुंचे और कॉलेज के दिनों को याद किया। जूनियर छात्रों ने अपने सीनियर और पूर्व छात्रों का दिल से स्वागत किया, उनके अऩुभव जाने।

इस दौरान कई बार हंसी-ठिठोली का दौर भी चला। पूर्व छात्रों ने मंच पर आकर कॉलेज के दिनों के दिलचस्प किस्से सुनाए जिस पर कॉलेज की प्रिंसिपल और शिक्षक मुस्कराये बिना नहीं रह पाए।

एल्युमिनाई मीट ऐसा अवसर होता है जहां आप अपने संघर्ष, सफलता और कामयाबी की कहानी अपने उन दोस्तों से साझा करते हैं जिनके बिना कभी आपके दिन नहीं कटते थे। एल्युमिनाई मीट में छात्र अपने उन शिक्षकों को दिल से धन्यवाद देते हैं जिनके मार्गदर्शन की बदौलत छात्र सफलता के मुकाम पर खड़े हैं।

दिन भर एक दूसरे से मिलने, बातें करने के बाद शाम को जब एल्युमिनाई मीट के समाप्ति का समय आया तो तमाम छात्रों की आंखों में आंसू भर आए। कुछ अपने पुराने दोस्तों से एक बार फिर दूर हो जाने को लेकर भावुक हुए तो कुछ छात्र अपने उन शिक्षकों को बार-बार धन्यवाद देकर भावुक हुए जिनकी एक डांट ने उनके करियर को पटरी पर लाकर खड़ा कर दिया।

इस दौरान एसआरआईपी की प्रिंसिपिल डॉ. चंचलदीप कौर भी कई बार अपनी भावनाओं को काबू में करते हुए नजर आईं। लेकिन कहते हैं न कि खुशी औऱ गम के आंसू छिपाये नहीं छिपते हैं।

डॉ. चंचलदीप कौर ने कहा कि उनके पढ़ाये छात्र आज देश के कोने-कोने में उनका नाम रौशन कर रहे हैँ। कामयाबी के शिखर पर बैठे पूर्व छात्र जब उन्हें अपनी सफलता का श्रेय देते हैं तो आंसुओं का जाना स्वाभाविक है।

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