श्री रावतपुरा सरकार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सिटी ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी में विराजे गजानन, 10 दिन तक मनाया जाएगा गणेशोत्सव।

रायपुर, 2 सितंबर 2019

सनातन धर्म के पंच देवों- श्रीहरि, शिव, सूर्य, दुर्गा के पहले बुद्धि, ज्ञान और विवेक के प्रतीक गणेश को स्थान दिया गया है। इसलिए सनातन धर्म के सभी मंदिरों में श्री गणेश विराजमान हैं।

इसलिए कि गणेश जी से विवेक लो, ब्रह्म ज्ञान लो, तभी श्रीहरि, शिव, सूर्य और दुर्गा को समझ पाओगे। विद्वानों ने कहा भी है, ग अक्षर ज्ञान का और ण अक्षर निर्वाण का वाचक है।

ज्ञान और निर्वाण के ईश परब्रह्मा गणेश को मैं प्रणाम करता हूं। राम को पाना है तो प्राणी में सुप्त अवस्था में मूलाधार चक्र में विराजमान गणेश को जगाना होगा।

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर श्री रावतपुरा सरकार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूंशस के सिटी ऑफिस सहित सभी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी एवं कैंपसों में गणपति की प्रतिमा स्थापित की गई है।

पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गणेश जी की प्रतिमा समता कॉलोनी स्थित सिटी ऑफिस में विराजित की गई। संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. जे.के उपाध्याय एवं कार्यकारी निदेशक पी.सी. मिश्रा गणपति पूजा में शामिल हुए।

उन्होंने श्री गणेश जी की पूजा पाठ कर सभी की खुशहाली, सुख और समृद्धि की प्रार्थना की है। गजानन की पूजा में सिटी ऑफिस के समस्त कर्मचारी और स्टाफ शामिल हुए।

श्री रावतपुरा सरकार इंटरनेशनल स्कूल, कुम्हारी में भी गणपति की प्रतिमा की स्थापना की गई है। एसआरआई इंटरनेशनल स्कूल कुम्हारी में स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. प्रीति गुरनानी एवं अन्य स्टाफ की मौजूदगी में गणेश भगवान की पूजा की गई।

आज से अगले 10 दिनों तक सभी कैंपसों में विराजित की गई गणेश प्रतिमाओं की सुबह शाम पूजा-आरती की जाएगी। 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाएंगे। एसआरआई के संस्थानों में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा ही स्थापित की गई है।

भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। भगवान गणेश को गजानन, गजदंत, गजमुख जैसे नामों से भी जाना जाता है। हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल हिन्दू पंचाग के भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को  मनाया जाता है।

गणेश भगवान के उत्पत्ति की कथा –
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने से पहले चंदन का उपटन लगा रही थीं। इस उबटन से उन्होंने भगवान गणेश को तैयार किया और घर के दरवाजे के बाहर सुरक्षा के लिए बैठा दिया। इसके बाद मां पार्वती स्नान करने लगे। तभी भगवान शिव घर पहुंचे तो भगवान गणेश ने उन्हें घर में जाने से रोक दिया। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और गणेश सिर धड़ से अलग कर दिया। मां पार्वती को जब इस बात का पता चला तो वह बहुत दुखी हुईं। इसके बाद भगवान शिव ने उन्हें वचन दिया कि वह गणेश को जीवित कर देंगे। भगवान शिव ने अपने गणों से कहा कि गणेश का सिर ढूंढ़ कर लाएं। गणों को किसी भी बालक का सिर नहीं मिला तो वे एक हाथी के बच्चे का सिर लेकर आए और गणेश भगवान को लगा दिया। इस प्रकार माना गया कि हाथी के सिर के साथ भगवान गणेश का दोबारा जन्म हुआ। मान्यताओं के अनुसार यह घटना चतुर्थी के दिन ही हुई थी। इसलिए इस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।

इस बार गणेश चतुर्थी पर बने हों दो योग

गणेश चतुर्थी पर लंबे समय बाद कई शुभ संयोग बनेंगे। एक ओर जहां ग्रह-नक्षत्रों की शुभ स्थिति से शुक्ल और रवियोग बनेगा, वहीं सिंह राशि में चतुर्ग्रही योग भी बन रहा है। यानि सिंह राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र एक साथ विद्यमान रहेंगे। ग्रहों और सितारों की इस शुभ स्थिति के कारण इस त्योहार का महत्व और शुभता और बढ़ जाएगी। ग्रह-नक्षत्रों के इस शुभ संयोग में गणेश प्रतिमा की स्थापित करने से सुख-समृद्धि और शांति मिलेगी।

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